प्लेटो का दार्शनिक राजा

  • प्लेटो एक तार्किक दृष्टिकोण विचारक था। प्लेटो का मानना ​​था कि जब तक राज्य मे दार्शनिक राजा की उप्लब्धि नहीं होगी , तब तक राज्य में शांति और शांति स्थापित नहीं की जा सकती है।

 

  • उनका अनुभव 50 वर्षों के जीवन पर आधारित था, जिसमें उन्होंने ग्रीस सहित कई अन्य राज्यों का अध्ययन किया है। जिसका उल्लेख उन्होंने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक THE REPUBLIC में भी किया है।
Plato

दार्शनिक राजा के विशेष गुण :-

  • को एक श्रेष्ठ प्रशासक होना चाहिए।
  • वह वास्तव में अपने लोगों से बेहद प्यार करता है।
  • वह मृत्यु से नहीं डरता।
  • वह निर्भीक रहता है।
  • वह हर लालच और स्वार्थ से दूर रहता है।
  • एक दार्शनिक शासक के शासनकाल के दौरान, राज्य में हर जगह प्रगति होती है, चाहे वह शिक्षा, स्वास्थ्य, सैन्य और व्यापार क्यू ना हो।
  • वह अपने राज्य के आसपास के राज्यों के साथ दोस्ती बनाए रखता है।

 

Note:-प्लेटो ने अपनी पुस्तक “द रिपब्लिक” में राजा के विशेष गुणों का उल्लेख किया है, जो इस प्रकार थे  : –

निरंकुश राजा पर कुछ सीमाएँ: -

  • स्वयं के मन को नियंत्रित करने की शक्ति होनी चाहिए
  • दूसरे राज्य की सीमाए छोटी होनी चाहिए
  • न्याय की समुचित व्यवस्था होनी चाहिए
  • उसे अपने राज्य में शिक्षा की व्यवस्था करनी चाहिए

 

Note:- प्लेटो ने “दार्शनिक-राजा” को अपने आदर्श राज्य के भीतर एक निरंकुश शासक माना और सत्तावादी और राजतंत्र की तुलना में सत्तावादी शासकों और निरंकुश शासन को अधिक प्रमुखता दी।

दार्शनिक राजा के दोष / कामिया :-

  • एक दार्शनिक-राजा को खोजना आसान नहीं है।
  • दार्शनिक राजा को कोई व्यावहारिक ज्ञान नहीं है।
  • वह अपने जीवन के 35 वर्ष अध्ययन मे ही गुजर देता है।
  • वह घमंडी और चापलूस होता है।